पटना में ओलंपिक्स

पटना में ओलंपिक्स-

स्थान- पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स

‘नमस्कार, मैं सुनील चुतर्वेदी अपने साथी चमन लाल के साथ आपका स्वागत करता हूँ ओलंपिक्स ओपनिंग सेरेमनी में जो आज दुनिया के एक ऐसे शहर में हो रही है जिसका इतिहास बहुत ही गहरा और रोचक रहा है. इसी प्राचीन शहर में बने पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स के इस आधुनिक स्टेडियम में सभी देशों के खिलाडी आकर जुटे हैं…अपने अपने झंडों के नीचे. सभी राजनीतिक नेतागण अपना सबसे पसंदीदा काम करने को काफी उत्सुक दिख रहे हैं…आग लगाने का काम. और ये आयी ओलुम्पिक मशाल जिसे अब बिहार के स्वास्थ्य मंत्री श्री तेजप्रताप यादव को देने की कोशिश की जा रही है…परंतु वो शायद किसी बात पे खफा हैं…उनके पिता लालूजी ने आगे बढ़कर वो मशाल पकड़ ली है…और ओलिंपिक फ्लेम की तरफ बढ़ते जा रहे हैं…अब उनके साथ सुशिल और नरेंद्र मोदी, नितीश बाबु और भी कई राजनितिक लोग दौड़ रहे हैं…सभी अपना हाथ उस मशाल से लगाकर रखना चाहते हैं. और ये फ्लेम के प्लेटफार्म पर पहुँच कर सभी नेताओं में छीना- झपटी शुरू हो गया है….तभी क्राउड से ‘मोदी- मोदी’ की आवाज आने लगती है और दोनों मोदी मशाल छोड़ अपने प्रशंषकों का अभिवादन करने लगते हैं. इधर लालूजी और नितीश बाबु में खींच-तानी चल रही थी की वहां खड़े पटना पुलिस के सिपाही ने अपनी बीड़ी फ्लेम में फ़ेंक कर अनजाने में उसे ज़िंदा कर दिया है….जी हाँ ‘दी ओलंपिक्स गेम्स आर नाउ ओपन’…एक सिपाही की बीड़ी के बदौलत.
बाकि नेता लोगों ने अब लड़ना बंद कर दिया है और मोदीजी के साथ सेल्फी खिंचवा रहे हैं…नितीश बाबु को छोड़ कर.’

‘चलिए नेताओं को छोड़ वापस खेल का रुख करें…और ये पहला इवेंट साइकिलिंग…सभी साइकिल सवार मेन स्टेडियम से निकल कर राजेंद्र नगर ओवरब्रीज क्रॉस करके मोईन-उल -हक़ स्टेडियम तक जायेंगे…वहां का पांच चक्कर काट के वापस मेन स्टेडियम. और ये रेस शुरू…सभी साइकिलिस्ट काफी तेज़ी से आगे बढ़ते हुए…प्ररन्तु ओवरब्रीज पर चढ़ाई के समय उनकी गति थोड़ी धीमी हुई है…अरे ये क्या!!!…ये रेस के रूट में एक रिक्शा वाला भी घुस गया है…उसके रिकशे पर दो दो ‘हेल्थी’ लेडीज हैं जो दना -दन अपने अपने सास का बुराई किये जा रही है…और ये क्या रिक्शा वाले ने इन सभी सायकलों को ओवरटेक करके सबसे पहले ओवरब्रीज क्रॉस कर लिया है…गज़ब की बात’

‘आइये अब आपको ले चलते हैं मैराथन रेस की लाइव कवरेज की तरफ…सभी धावक पटना की सड़को पर भागते हुए…गाँधी मैदान के पास एक चेक पॉइंट है…यहाँ लोग धावकों को पानी वगैरह दे रहे हैं….और ये आये भारत के धावक तेज़ बहादुर…उनको किसी बिहारी ने पानी की जगह सत्तू का गिलास पकड़ा दिया है…और ये क्या…सत्तू पीते ही तेज़ बहादुर और भी तेज़ हो गए हैं…एक के बाद एक धावक को पछाड़ते जा रहे हैं…फिनिश लाइन सिर्फ सौ मीटर दूर…सिर्फ एक केन्या के अजीब से नाम वाले खिलाडी उनके आगे…और ये सत्तू के सुपर एनर्जी से रिचार्ज होकर तेज़ बहादुर ने धावक को भी पछाड़ कर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है’

‘आइये अब थोड़ा वेट लिफ्टिंग की तरफ रूख करते हैं…सभी खिलाडी प्रैक्टिस करते हुए…ये गैंडे जैसे दिखने वाले कज़ाख़िस्तान के बोराट बेंचप्रेसकी ने अभी अभी २०० KG स्नैच एंड लिफ्ट करके दिखाया है…अब वो वापस अपनी जगह पर जाते हुए…परंतु रास्ते में एक सब्ज़ी वाली, भारतीय टीम के खिलाडियों को कुछ सब्ज़ियां बेचती हुई…पता नहीं ये लोग कैसे अंदर आ जाते हैं…सब्जीवाली ने बोराट को रोक कर उनसे अपना दौड़ी (सब्जी का बास्केट) उठाने में हेल्प करने की गुज़ारिश की है…बोराट जी काफी अच्छे दिल के है…वो मदद के लिए आगे बढे…परंतु ये क्या एक सब्ज़ी की दौड़ी उठाने में उनको काफी मशक्कत करनी पड़ रही है…किसी तरह वो उस सब्ज़ी वाली के सर पे वो दौड़ी दाल पाए हैं. अब वो घूर घूर कर उस सब्जीवाली को घोर आश्चर्य वाले भाव के साथ देखे जा रहे हैं’

‘आइये अब आपको तीरंदाजी की तरफ ले चलते हैं. भारतीय खिलाडियों का काफी अच्छा प्रदर्शन…और ये भारत की झिलमिल टुडू ने ‘सांढ़ की आँख’ यानि की बुल्स आई को हिट कर दिया है…सभी उन्हें मुबारकबाद देते हुए…अरे..ये क्या…अभी अभी एक लंबी सी चीज़ उड़ती हुई आयी है और तीर के ऊपर कवर की तरह फिट हो गयी है…ओह्ह…ये तो कोई अखबार है…और वो रहा अखबार वाला जिसने शायद किसी की बालकनी का निशाना लगाया था, बस ‘थोड़ी’ सी चूक हो गयी.’

‘गंगा नदी में रोइंग और कयाकिंग कम्पटीशन चल रहा है, परंतु कोई टीम दिख नहीं रही…चमन, आपको कुछ पता है?’
‘अरे भाई आप अगस्त के महीना में, जब गंगाजी फुल फॉर्म में रहती हैं, कयाकिंग करने जाइयेगा तो संभालेगा किसी सी…सब बह गया होगा करंट के साथ.’
‘लगता है आप सही कह रहे हैं चमन….अभी खबर आयी है की अमेरिका की कयाकिंग टीम मुंगेर पहुँच गयी है और फ्रांस की टीम तो भागलपुर…वो लोग अब फ़ोन करके पूछ रहे हैं की कौन सा ट्रेन पकड़ के वापस आएं’

‘और अभी अभी खबर आयी है की कुछ लोग ओलिंपिक फ्लेम के आसपास मंडराते हुए पकडे गए हैं…पूछ ताछ करने पर पता चला की वो लोग लिट्टी सेकने आये हुए थे…मगर फ्लेम की ज्यादा गर्मी के चलते बेचारों की लिट्टी, गिट्टी में तब्दील हो गयी थी. पुलिस ने उनको दो-दो लप्पड़ मार के छोड़ दिया है’

‘आइये अब आपको स्विमिंग कम्पटीशन में ले चलते हैं…यहाँ कोई भारत का खिलाडी नहीं फिर भी भयानक भीड़…क्या कारन हो सकता है चमन’
‘कारन क्या होगा…इतनी सारी पतली दुबली अँगरेज़ गोरी लड़की सब स्विम-सूट में पटना में कभियो दिखी है क्या? उसी का भीड़ है…जाइये न लड़का वाला पूल में देख के आइये…एगों कौवा तक नहीं मिलेगा उधर आपको’

‘चलिए पटना का ओलिंपिक इस प्रकार समाप्त हुआ…लगता है देशी विदेशी सभी खिलाडियों को उतना ही आनंद आया जितना आप सबको ये पोस्ट पढ़कर आया होगा…जय हो’

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