मुबारक हो! आप सभी को बेटा हुआ है…

beti padhao logo final_retouch 1एक कोशिश है फीमेल फिटिसाइड एवं इंफंटसाइड जैसे गंभीर विषय को थोड़ा हल्का बनाकर लिखने की. उम्मीद है आप सब को पसंद आएगी ये लघु कथा.

बेटी बचाओ…बेटी पढ़ाओ मिशन को समर्पित.

शीर्षक- मुबारक हो! आप सभी को बेटा हुआ है.

विक्रम को हल्की नींद आ रही थी. कमरे में अँधेरा था. उसने अपना आई-फ़ोन पर टाइम पास करने की कोशिश की थी मगर डॉक्टर साहिबा ने थोड़े गुस्से में ही फ़ोन बंद करने को कहा था…
‘इंटरफेरेंस’
सामने लतिका लेटी थी…उसके पेट पर ठंडा ठंडा अल्ट्रासाउंड वाला क्रीम लगा हुआ था…जिसके ऊपर डॉक्टर साहिबा अपना सेंसर घुमा रही थी. ऊपर लगे स्क्रीन पर एक एलियन जैसे दिखने वाले जीव का धुंधला सा ब्लैक एंड वाइट इमेज बन रहा था. विक्रम से अब और टेंशन बर्दाश्त नहीं हो रहा था,
‘तो रणबीर है की कटरीना?’
डॉक्टर साहिबा ने तुर्रन्त जवाब नहीं दिया…कुछ देर और अलग अलग एंगल से सेंसर घुमाने के बाद बोली,
‘अभी कुछ कह नहीं सकते…बॉबी डार्लिंग भी हो सकता है…दो वीक बाद आओ तो कुछ क्लियर होगा’
विक्रम ने मन ही मन डॉक्टर साहिबा को कोसा…
‘अच्छा बहाना है हज़ार रुपये का और चूना लगाने का. अठारह वीक तो हो गए थे. अब तक तो पता चल जाना चाहिए…एक और अपॉइंटमेंट…एक और बिल’
खैर, वो कर ही क्या सकते थे. काउंटर पर बैठे मोटे से केशियर से रसीद लेकर दोनों वापस घर की तरफ चल दिए. लतिका थोड़ी उदास लग रही थी मगर. आज पहली बार विक्रम ने ये इशू उठाया था. गाडी स्टार्ट होते ही रेडियो मिर्ची पर ‘डीजे वाले बाबु’ का आह्वाहन शुरू हो गया था. लतिका ने रेडियो का वॉल्यूम कम किया.
‘तुम्हे इन सब बातों से कब से फर्क पड़ने लगा?’
‘छोड़ो, तुम नहीं समझोगी’
‘क्या नहीं समझेंगे…कुछ मलयालम में सोचे हुए हो क्या? हिंदी में समझाओ तो समझ जायेंगे. रणबीर या कटरीना से क्या फर्क पड़ता है’
विक्रम कुछ नहीं बोला. लतिका ने भी बात की ज्यादा खींचने की कोशिश नहीं की. अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट अच्छी आयी थी..वो उसी बात से संतुष्ट थी.
घर पहुँचने पर लतिका की सास, मिसेज सरिता शर्मा ने भी अपने मंझले सुपुत्र की तरह ही इशारों इशारों में पूछने की कोशिश की, फिर निराश होकर चली गयी.
‘अगर अठारह सप्ताह बाद भी डॉक्टर को समझ नहीं आया तो ज़रूर लड़की ही होगी’
सरिता जी दुखी हो गयी. बड़े वाला लड़का इंजीनियर था…बिहार सरकार में अफसर था…बहु भी नौकरी में थी…बस एक ही ‘कमी’ थी…एकमात्र संतान स्त्रीलिंग थी. मंझले वाले ने जैसे तैसे कॉलेज पास करके किसी एक अम्बानी की, बीमा वाली कंपनी में नौकरी पायी थी. बोलने में तो तेज़ था ही, जोकि उसके पेशे के लिए एक ज़रूरी और लाभदायक गुण था. उसकी माँ को बड़ी उम्मीद थी की वो उसकी गोद में एक पोता ही लेकर डालेगा. मगर आज की घटनाओं ने सरिता जी को थोड़ा दुखी कर दिया था. रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर मिस्टर बिनय कुमार शर्मा ने अपनी अर्धांगिनी सरिता जी के लटके हुए मुँह को देखकर बात का अंदाज़ा लगा लिया.
‘हम समझ रहे हैं तुम्हारा मूड क्यों डाउन है. अल्ट्रासाउंड करवाने गया था न सब. तुम लोग आज के समय में भी ऐसा सोचते हो ये देखकर हमको दुःख से ज्यादा आश्चर्य होता है…इतना सिनेमा…इतना टीवी सीरियल…इतना विज्ञापन देखने के बाद भी कोई असर नहीं हुआ है ना’
‘छोड़िये सिनेमा और टीवी को…आप अपना फिलॉसॉफी अपने पास रखिये…गनीमत कहिये की हम आपको तीन तीन बेटा और सिर्फ एक बेटी दिए…नहीं आपके जैसा लीक पकड़ के चलने वाला आदमी का तो भट्ठे बैठ जाता चार चार बेटी का शादी कराने में’
‘वाह, अभी तो कितना आसानी से सब लड़का का शादी हो जा रहा है न…विक्रम का तो जैसे तैसे हुआ…संजू बाबु का तो लगता है की अब लव मैरिज ही होगा’
सरिता ने मन ही मन सोचा,
‘ठीक ही तो कह रहे हैं…विक्रम के लिए तो कोई लड़की नहीं मिल रही थी…कितनी लड़कियों ने तो अपने तरफ से उसको रिजेक्ट कर दिया था…संजू के लिए तो अभी तक अगुआ भी नहीं आया है’
मगर सदियों से चली आ रही सोच इतनी जल्दी कैसे बदल सकती थी. सरिता जी ने सोने से पहले एक बार अपने छोटे से मंदिर में माथा टेका और महादेव का आह्वाहन करके ‘पौत्र- सुख’ की मनोकामना व्यक्त की.
‘हे प्रभु…हमें सिर्फ पोता चाहिए…अगर लड़की है उसकी कोख में तो कुछ चमत्कार करके उसे लड़के में बदल दीजिये प्रभु…हमें लड़की नहीं लड़का चाहिए’
उनको ये नहीं पता था, की जब वो ये मनोकामना सच्चे मन से मांग रही थी, पृथ्वी के वायु-मंडल में उल्का-पिंड की बारिश हो रही थी (मिटिओर शावर ) हो रहा था…अनेको टूटते तारों ने उनकी मनोकामना पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी. सरिता जी भारी मन लिए सो गयी.

‘टी-टी -टी-टी’
अलार्म की आवाज से सरिता जी की नींद खुली. उन्हें आश्चर्य हुआ. रोज़ तो अलार्म से पहले ही उठ जाती थी. खैर उठ कर फ्रेश हुईं. फिर पूजा के फूल लेने बगिया में पहुंची.
‘हैं, कल ही शाम में तो कितने फूल खिले थे…आज एक भी नहीं…बड़े बेशरम है ये कॉलोनी की लेडीज सब…एक बार तोड़ने क्या बोल दिए…पूरा बागीचा ही साफ़ कर दी’
गुस्से में सरिता जी ने बगल वाले घर की तरफ देखा,
‘तिवारी जी का तो सारा फूल सलामत है…सिर्फ हमसे ही दुश्मनी था सबको’
सरिता जी थोड़े संकोच के साथ तिवारी जी के यहाँ से थोड़े फूल तोड़ लायी. पूजा की सामग्री लेकर अपने छोटे से मंदिर में बैठी. सामने भगवान महादेव की तस्वीर देखकर उनके होश उड़ गए…महादेव अकेले ही कैलाश पर्वत पर बैठे थे…बगल से पार्वती जी गायब थी.
सरिता जी की आँखे अब हनुमान जी की तस्वीर पर गयी…हनुमान जी की ह्रदय में राम और लक्ष्मण तो विराजमान थे…सीता जी का कोई अता पता नहीं था. सरिता जी का सर घूमने लगा…तभी कोने में रखे दिवाली के समय खरीदे गए गणेश जी दिखे…बेचारे अकेले थोड़े दुखी लग रहे थे…लक्ष्मी जी कहीं अंतर्ध्यान हो गयी थी. सरिता जी ने अपने आप को संभाला,
‘ज़रूर किसी ने बहुत ही भद्दा मज़ाक किया है’ गुस्से से तमतमाती वो कमरे के बाहर आयी. उनके पति ड्राइंग रूम में अखबार चाट रहे थे.
‘अरे कल ही न वो पहलवान जीती है मैडल ओलिंपिक में…फ़ोन में तो अपडेट आया था…अखबार में लेकिन कोई ज़िक्र ही नहीं है…लगता है अखबार पहले छप गया होगा’
शर्मा जी ने टीवी ऑन किया…एनडीटीवी चैनल लगाते ही दूसरा झटका…स्पेशल रिपोर्ट आ रही थी…और सलवार कुरता पहने श्रीनगर की सड़कों पर बरखा दत्त की जगह रविश कुमार घूम रहे थे…’कश्मीर में बहुत तनाव है और जो है सो तो हइये है’ करते हुए. शर्मा जी का फ्यूज उड़ गया…उन्हें लगा कोई मज़ाक चल रहा है. उन्होंने चैनल बदला…सीरियल का नाम आया, ‘ससुराल समर का’…अगला चैनल, ‘भैय्याजी घर पर हैं?’…अगला चैनल ‘बालक वर’…अगला…’कॉफ़ी विथ करण’…’चलो ये ठीक है ‘, शर्मा जी ने सोचा.
‘आज एक अप्रैल तो नहीं है’
‘नहीं, मगर कुछ तो गड़बड़ चल रही है…एक बार मेरे मंदिर में झांक कर आइये न’
इधर शर्मा जी बेड रूम में गए, उधर सरिताजी की नज़र अपने सास-ससुर के बड़े पोर्ट्रेट पर गयी जो ड्राइंग रूम में टंगा था. उनकी सास मौजूद थी उस फोटो में…
‘बताइये! जिनको सच में गायब होना चाहिए वो आराम से विराजमान हैं’ सरिताजी की सास ने उन्हें काफी प्रेम के साथ प्रताड़ित किया था. मगर तभी उन्हें उस फोटो में कुछ अलग सा दिखा. उनकी सासु माँ की मूंछें निकाल आयी थी…थोड़ी दाढ़ी भी. सरिता जी की हंसी छूट गयी…मगर वो हंसी ज्यादा देर तक उनका साथ नहीं दे पायी…ऊपर वाले बाथरूम से उनकी एकमात्र सुपुत्री, मेघा की चीखने की आवाज आयी…लोग भागे भागे आये. मेघा ने सिर्फ माँ को अंदर आने का अवसर दिया.
मेघा ने अपना मुँह ढँक रखा था…आँखों से झर झर आंसू बह रहे थे..
‘क्या हुआ…हाँथ हटा न’
मेघा ने हाथ हटा दिया…उसका चेहरा देखकर सरिता जी को हल्का सा चक्कर आ गया. मेघा का चेहरा बिलकुल मरदाना हो गया था…दाढ़ी मूंछ भी हल्का हल्का आ ही गया था.
‘माँ, क्या हो रहा है हमको? कोई टोना टोटका कर दिया है हम पर…कुछ करो माँ…पंडित जी को बुलाओ’
सरिता जी को तो काटो तो खून नहीं…जो बात कुछ देर पहले तक उन्हें किसी की बदमाशी या मजाक लग रही थी, उस बात ने अब एक गंभीर रुख ले लिया था.तभी बाथरूम के दरवाज़े पर दस्तक हुई. विक्रम ने आवाज दी,
‘माँ एक बार बाहर आना’
सरिता जी अपने आंसू रोकते हुए बाहर आयी.
‘माँ, वो संजू के लिए जो बात चल रहा था, वो लोग बोल रहे हैं की लड़की तभी देंगे जब हम संजू और उसकी होने वाली पत्नी को अलग फ्लैट, गाड़ी और मेंटेनेंस का खर्च देने को तैयार होंगे…और ये सब वो एक कॉन्ट्रैक्ट के जैसा साइन करवा के लेंगे हमसे…बोल रहे थे उनकी बेटी के लिए कम से बीस और लोग उनकी खुशामद में लगे हुए हैं’
‘संजू के लिए अगुआ कब आया?’
सरिता जी का सर अभी तक घूम रहा था.
‘अगुआ आया कहाँ था माँ…क्या बे-सर-पैर की बात कर रही हो…ये तो हम लोग गए थे ना उनके यहाँ संजू का रिश्ता लेकर…पूरे ज़िले में सौ से भी कम लड़कियां हैं और हज़ारों लड़के…देख लो अब तो कुछ फिक्स्ड डिपाजिट तुड़वाने पड़ेंगे या सोना बेचना पड़ेगा…वरना तो मुश्किल है’
‘सोना’ सुनकर सरिता जी का होश वापस आया…भागी भागी वो वापस अपने कमरे में आयी. शर्मा जी बिस्तर के नीचे लक्ष्मी जी को खोज रहे थे.
सरिता जी ने अपनी पुरानी अलमारी खोली…उसके अंदर का पुराना लॉकर खोला…सबसे अंदर से एक लाल रंग का मखमली बैग निकल…सोने की चैन…सलामत थी…एक छोटी सी सोने की अंगूठी…सलामत है…दुर्गा जी की सोने की मूर्ति जो उन्होंने अपने बाकि जेवर गलवा के बनवाये थे…उसमें सिर्फ अब एक ताँबे का ‘शेर’ बचा था…दुर्गा जी भी रुठ कर चली गयी थी.
सरिता जी को अपनी गलती का एहसास हुआ…लगता है मेरी तरह सबने बेटी की जगह बेटा ही माँगा…अब न मेरे बाग़ में रौनक है…ना मेरे मंदिर में आशिर्वाद…न रक्षा करने के लिए दुर्गा है…न सम्पन्नता के लिए लक्ष्मी. सरिता जी बिस्तर पर बैठ कर रोने लगी…तभी उन्हें लगा की कोई उन्हें पीछे से हिला रहा है…
‘दादी…उठो न…कब तक सोओगी…नौ बज रहे हैं’
सरिताजी हड़बड़ा कर उठी…सामने पोती इशानी खड़ी थी. उन्होंने मुड़ कर अपने मंदिर में देखा…महादेव पार्वती जी के साथ कितने अच्छे लग रहे थे…उधर हनुमान जी की मुस्कान थोड़ी और उल्लासपुर्ण हो गयी थी अपने ह्रदय में सीताजी को वापस देखकर…कोने में बैठे गणेश जी भी लक्ष्मी जी के सानिध्य में पुलकित हो रहे थे.
सरिता जी ने इशानी को ज़ोर से सीने से लगा लिया…शायद पहली बार.
‘क्या हुआ दादी…मुझे क्यों इतनी ज़ोर से पकड़ रही है…मैं तो बस जगाने आयी थी’
‘जाग तो गयी बेटा…आज बहुत गहरी नींद से बरसों बाद जगी…’
इशानी ने सोचा, ‘माँ सच ही बोलती है…दादी का स्क्रू थोड़ा ढीला हो गया है’
सरिता जी ने इशानी की पप्पी ली और विक्रम के कमरे में गयी. लतिका और विक्रम बैठे टीवी ताक रहे थे…विक्रम ने गाना पॉज कर दिया…स्क्रीन पर इस बार रणबीर और दीपिका फ्रीज हो गए थे. सरिता जी ने दोनों की तरफ इशारा करते हुए दोनों सुपर स्टार्स को ‘थम्स अप’ दे दिया. इधर लतिका को लगा जैसे बच्चे ने पहला किक मारा खुश होकर.

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