प्रवाह के खिलाफ

उन सभी भारतीय एथलीटों को समर्पित जिन्होंने अपनी जान लगा दी रियो में-

एक लघु कथा – प्रवाह के खिलाफ

स्थान – Tokyo Olympics Swimming Event, 31 July,2020

‘नमस्कार, मैं सुनील चतुर्वेदी आपका एक बार फिर स्वागत करता हूँ टोक्यो के इस जगमगाते अत्याधुनिक स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में. आज स्विमिंग कम्पटीशन के फाइनल्स चल रहे हैं और कुछ ही देर में फीमेल बटरफ्लाई स्ट्रोक का फाइनल होने वाला है…ये आ गए सारे तैराक…नंबर 5 लेन में हैं भारत की सीमा यादव. पूरे भारत के लिए बहुत ही गर्व का दिन…पहली बार कोई महिला तैराक ओलंपिक्स में ना सिर्फ क्वालीफाई की हैं बल्कि फाइनल में भी पहुंची हैं…उनसे सभी डेढ़ अरब लोगो को एक मैडल की उम्मीद है…देखना है वो कैसा प्रदर्शन करती हैं…और ये सभी तैराक पोजीशन में…ये रेस शुरू…शुरू से ही बढ़त ले ली है अमेरिका की तैराक शेरील जॉनसन ने…सीमा अभी चौथे स्थान पर. ये पहुंचे सभी तैराक दुसरे छोर पर…वापस गुलाटी मारी और आखीरी लैप में सभी तैराक जान लगाते हुए…सीमा अब धीरे धीरे आगे आती हुई…ये उन्होंने रूस की नाडिया को पछाड़ कर तीसरे स्थान पकड़ा…और अब तेज़ी से दुसरे स्थान के लिए ब्रिटैन की अडेल को चुनौती देती हुई…और जी हाँ…अडेल को भी पछाड़ दिया है सीमा ने और अब उनसे सिर्फ आधे मीटर आगे चल रही शेरील की तरफ एक शार्क की तरह बढ़ती हुई…और ये सीमा ने गज़ब के स्टैमिना का प्रदर्शन करते हुए शेरील को भी पछाड़ कर पहला स्थान ले लिया है इस रेस में…मगर उनकी गति अभी धीमी नहीं हुई है…वो और तेज़ी से फिनिश लाइन की तरफ बढ़ती हुई…सभी तैराक अब उनसे करीब दो मीटर पीछे…भारत का गोल्ड मैडल पक्का…और ये सीमा ने पीछे मुड़ कर देखा…’

‘कजरी…कजरी…आह आह आह…’ सीमा ने आवाज दी. कजरी भैंस ने मटमैले पानी से अपना सर बाहर निकाला.
‘वहां छुपी है तुम…चलो घर अब…कितना नहाएगी’
सीमा की उलाहना सुनकर कजरी ने धीरे धीरे अपनी स्थूलकाय काया को गांव के पोखर (तालाब) के पानी से बाहर निकाला. भैंसों के लिए गर्मी के दिन में पोखर में पड़े रहना उतना ही आनंददायक कार्य था जितना की मनुष्यों का सर्दी के दिनों में रजाई में घुस कर पड़े रहना. खैर, अनमने ही सही…सभी भैंसिया अपनी लीडर सीमा के इशारे पर एक एक करके पोखर से बाहर आने लगी. तभी वहां प्रकट हुए गांव के सबसे इनइलीजिबल बैचलर…टुन्ना कुमार…
‘क्या सीमा…आज फिर तैर रही थी न तुम…हमारा थोड़ा इंतज़ार कर लेती…देखो ये तुम सलवार कुरता पहन के तैरती हो सो हमको अच्छा नहीं लगता है…कपडा भी गीला हो जाता है तुम्हारा…तुम्हारे लिए स्पेशल पटना से लाये हैं तैराकी का ड्रेस…देखो न’
चौदह साल की सीमा जानती थी टुन्ना कितना ‘शरीफ’ और ‘संस्कारी’ बालक था. उसने टुन्ना को ज़रा सा भी भाव नहीं दिया और चुप चाप अपने घर की तरफ जाने लगी. मगर टुन्ना बाबु तो आज मूड बना के आये थे…
‘अरे देखो न…तुमको एक दम फिट’
टुन्ना कुमार का वाक्य पूरा नहीं हो पाया…पास से गुजर रही कजरी ने अपनी कीचड और गोबर से भरी पूँछ सीधा टुन्ना बाबु के थोबड़े पर दे मारी थी…
‘ए राम!!! गोबर लगा दिया मुँह पर…छी छी..थू थू..आक थू…’
इधर सीमा की हंसी छूट गयी…तभी सामने से उसका छोटा भाई बिनोद आता दिखा…
‘क्या हुआ दिदिया’
‘कुछ नहीं, कजरी ने उस ढक्कन के मुँह पे ‘फेसिअल’ कर दिया है…मुल्तानी गोबर वाला’
दोनों भाई -बहन हँसते हुए वापस घर पहुंचे…भैंसिया अपने आप ही बथान की तरफ चली गयी…इधर सीमा घर के पीछे जाकर अपने कपडे सुखाने लगी. माँ को अगर पता चल गया की आज उसने फिर पोखर का दो राउंड मार है तो फिर से सारा घर सर पे उठा लेगी.

‘अरे बिनोद…सब भैंसी तो आ गया है बथान में…दिदिया कहाँ है?’
बिनोद ने अपनी माँ की बात का जवाब देना मुनासिब नहीं समझा. बल्कि जल्दी से अपना किताब कॉपी खोलकर लालटेन के सामने बैठ गया.
‘बोलता क्यों नहीं?’
‘माँ, बहुत होमवर्क है हमको करने के लिए, हमको नहीं पता दिदिया कहाँ है’
‘अच्छा…लगता है फिर तैर कर आयी है…कपडा सुख रही है ना पीछे…ठहर अभी देखते हैं’
बिनोद की माँ, जो गांव में ‘सिमिया की माए’ के नाम से जानी जाती थी, अपनी बेटी सीमा को खोजने टोर्च लेकर चल दी. पीछे का दरवाज़ा खोलते ही झाड़ियों में सिमिया की माए को छोटे से अलाव की चमक दिखी.
‘क्यों रे सिमिया…आज फिर तैरने चली गयी थी ना पोखर में तू…मना किये थे न हम’
चौदह साल की सीमा यादव, अभी अभी सातवी क्लास में गयी थी. पढाई लिखाई और भैंस चराई के अलावा उनको तैरने का भी बहुत शौक था. मगर बिहार के देहाती इलाके में स्विमिंग पूल कहाँ से मिलता. अपनी भैंसों को जिस पोखर में नहलाने ले जाती उसी में एक दो ‘राउंड’ भी लगा लेती. तैरना उसने एकलव्य की तरह ही सीख था…दुसरे लड़को को देख देख कर. धीरे धीरे प्रैक्टिस कर कर के उसने अच्छा स्पीड और स्टैमिना बना लिया था. मगर बेचारी तैरती थी गांव के पोखर में…सलवार कुर्ते में ही. कितने बार कपडे गीले होने पर पहले तो सर्दी से पटकाई फिर माँ ने जो धुनाई की सो अलग. आज रात लगता है फिर से माँ के थप्पड़ों से ही पेट भरना पड़ेगा.
‘क्यों री…इतना मना करते हैं तो सुनती क्यों नहीं…अब तू बड़ी हो गयी है…पहले वाली बात नहीं रही…तेरे चाचा बता रहे थे की दुसरे घरों के लड़के आजकल पोखर पर जाकर बैठे रहते हैं…अब अच्छा नहीं लगता’
‘माँ, मुझे तैरना अच्छा लगता है…अब कोई जबरदस्ती आकर ताक रहा है तो उसमे मेरी गलती है या उसकी?’
‘फिर बहस…देख, तू चुप चाप मैट्रिक पास कर जा किसी तरह…फिर तेरी शादी कोई शहर के लड़का से करवा देंगे…उसको बोलना, तैराने ले जायेगा तुझे’
‘क्या माँ, हर बात तू वापस हमारी शादी पर ही क्यों लाकर रोक देती है’
‘तो क्या करूँ…ऐसे लक्षण रहे तो इस गांव के आसपास तो कोई लड़का नहीं मिलने वाला तुझे’
‘माँ, हमको नहीं करना है शादी वादी…हम तो ज़िन्दगी भर तुम्हारे पास ही रहेंगे…तुम्हारा गोर (पैर) दबाएंगे…माथा में तेल लगाएंगे…पप्पा का भी देख-भाल करेंगे’ ये बोलकर सीमा ने अपनी माँ के गले में हाथ दाल दिया…सिमिया की माए का सारा गुस्सा पिघल गया,
‘धत्त, क्या बे सिर-पैर की बातें करती है…हट, हमारा कपडा भी गीला करेगी क्या’
दोनों माँ -बेटी कुछ देर बाद वापस अंदर आ गए. बिनोद को ये देख कर ख़ुशी हुई आज जल्दी सुलह हो गयी थी. तभी बिनोद के पप्पा की साइकिल की घंटी बजी दरवाजे के बाहर. बिनोद कॉपी किताब फ़ेंक कर सीधा अपने पप्पा के सर पे सवार हो गया,
‘पटना से फाइव- स्टार लाये की नहीं?’
‘लाये हैं…पहले होम वर्क पूरा कर तब मिलेगा…सिमिया की माए…खाना निकालो’
खाना खिलाते हुए सिमिया की पप्पा ने बात शुरू की,
‘आज पटना जाते समय रमेश मिल गया था. बगल में आकर बैठ गया. सिमिया के बारे में कुछ कह रहा था’
सिमिया और उसकी माए दोनों का कौतुहल जाग गया ये सुनकर,
‘क्या कह रहा था?’
‘यही की सिमिया बहुत अच्छा तैरती है…उसका स्पीड बहुत फ़ास्ट है तैरने का…वो नापा है अपने घड़ी पर…हमको बोल रहा था, सिमिया को पटना में जो स्विमिंग कैंप लगता है, उसमें ले जाने के लिए’
‘वाह, वो लड़का अपनी बेटी को तैरते हुए देखता है…टाइम भी नोट करता है…और आप उससे हंस खेल के बात कर आये…दू लप्पड़ लगाए क्यों नहीं पहले’
‘अरे गुस्सा तो हमको भी शुरू में आ गया था, मगर अपने बोला की सिमिया उसकी छोटी बहन जैसी है…वो तो हमारे भले की ही बात कह रहा था…बोल रहा था की आजकल खेल-कूद में भी अच्छा करियर बन सकता है…कितना अच्छा कॉलेज में स्पोर्ट्स कोटा पर भी एडमिशन होता है’
अब तक परदे के पीछे से सुन रही सिमिया की चाची को बर्दाश्त नहीं हुआ,
‘कॉलेज में पढ़ के क्या करेगी…इंटरमीडिएट पास कर जाये नक़ल करके, वही बहुत है…फिर तो शादी और गृहस्थी ही संभालना है हमारे जैसा’
अपनी देवरानी की बात सुनकर सिमिया की माए का पूरा एंगल ही चेंज हो गया,
‘ठीक है… हमारी किस्मत में जो था, सो हुआ…मगर सिमिया के किस्मत में खेल-कूद से कुछ अच्छा हो सकता है तो हमें उसको रोकना नहीं चाहिए’
‘मगर भाभी, अभिये सब कितना बात बनाने लगा है…फिर शहर जाकर ये सब करेगी तो और मखौल उड़ेगा’
सिमिया की माए यह बात सुनकर थोड़ा सोच में पड़ गयी…सच में लोगों की जुबां पर तो वो लगाम नहीं लगा सकती. सिमिया के पप्पा ने मगर निश्चय कर लिया था,
‘बात बनाने वाला तो कुछो करियेगा, उसमे कुछ न कुछ मीन-मेख निकालिये देगा. यही सोच सोच कर की कौन क्या कहेगा…अभी तक वहीँ पड़े हुए हैं हम लोग’

कुछ समय तक सब कोई चुप रहे.
‘देखो, रमेश कह रहा था की वो इन्टरनेट पर चेक किया है…सिमिया का स्पीड बहुत अच्छा है…बोल रहा था की छुपा हुआ टैलेंट है उसमे…अगर अच्छा ट्रेनिंग और फैसिलिटी मिला तो और बढ़िया करेगी…आजकल तो खेल कूद में भी बहुत पैसा हो गया है’
सिमिया के पप्पा का निश्चय देखकर उसकी माँ के मन से भी संशय दूर हो गया,
‘कब है ये कैंप…पटना में तो डॉक्टर भैया के यहाँ रुकने का भी इंतज़ाम हो जायेगा’
‘अगले महीने है…हम जाकर पता भी कर लिए हैं…देखो क्या होता है’
इधर सीमा तो सीधा सातवे आसमान पर बैठी थी…एक असली स्विमिंग पूल में तैरेगी वो…ट्रेनर के गाइडेंस में…कितना मज़ा आएगा…मगर ये बीस दिन कैसे बीतेंगे.
बीस दिन देखते देखते बीत गए…सीमा अपने पप्पा के साथ पाटलिपुत्र स्पोर्टिंग काम्प्लेक्स के इंडोर स्टेडियम में आ पहुंची थी. इतना बड़ा बिल्डिंग देखकर उसने ज़िन्दगी में पहले कभी देखा नहीं था. जैसा रमेश ने कहा था…सीमा ने सभी तैराको को पछाड़ दिया.
एक अनजानी देहातिन लड़की का इतना अच्छा प्रदर्शन देखकर बिहार स्विमिंग एसोसिएशन के ट्रेनरों की आँखें फटी की फटी रह गयी.
‘क्या खिलाते हैं इसको?’ सिमिया के पप्पा से पुछा गया.
‘ज्यादा कुछ नहीं…सुबह शाम भैंस का ताज़ा दूध पीती है…गोइठा के लिए गोबर धानती है अपने पैरों से…शायद वही है सीक्रेट फार्मूला’
उसी सीक्रेट फॉर्मूले के बदौलत सीमा स्टेट लेवल से लेकर नेशनल लेवल के सारे चैंपियनशिप में अपना नाम रौशन करने लगी…अब आइये आपको वापस उस ओलिंपिक स्विमिंग पूल में ले चलते हैं.
‘सीमा यादव सबसे आगे…और ये रेस ख़तम…सीमा यादव ने भारत के लिए इस ओलिंपिक का पहला गोल्ड मैडल जीत लिया है…अमेजिंग परफॉरमेंस’
इधर सिमिया के छोटे से घर में बिहार सरकार द्वारा उपहार में दिए टीवी पर उस प्रदर्शन को देख रहे सीमा के परिवार में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है…सिमिया के पप्पा बिनोद के साथ बिहारी स्टाइल में भंगड़ा कर रहे हैं…उधर सिमिया की माँ अपने आँखों में छलके ख़ुशी और गर्व के आंसू पोछ रही थी. उन्होंने अपने बच्चे को प्रवाह के विरुद्ध बहने से रोका नहीं…बल्कि सहारा दिया…आज उसका स्वर्णिम फल उन्हें प्राप्त हुआ था.
इधर टोक्यो में सीमा पोडियम पर गोल्ड मैडल पहने, तिरंगे को धीरे धीरे सबसे ऊपर जाते हुए देख रही थी…उसके होठों पर जन-गण-मन के बोल थिरक रहे थे…पूरा देश आज उसके साथ खड़ा था.

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