फेमस बॉलीवुड मूवी सीन पे पटनिया तड़का # 2

फेमस हिंदी मूवी सीन का पटनाकरन ## 2
१. देवदास – एक नार्मल बिहारी छात्र (पढ़ने वाले ) की व्यथा-
‘बाबूजी ने कहा IIT फोड़ दो…माँ ने कहा मेडिकल फोड़ दो…मैं कभी कभी  सोचता हूँ अपना सर फोड़ दूँ…’
एक नार्मल बिहारी (नहीं पढ़ने वाले) छात्र की व्यथा-
‘बाबूजी ने कहा सिगरेट छोड़ दो…माँ कहती है गुटखा छोड़ दो…नितीश बाबू कहते हैं शराब छोड़ दो…हम तो सोचता हूँ की बिहार ही छोड़ दूँ’

२. अंदाज़ अपना अपना – क्लाइमेक्स सीन को थोड़ा घुमा दिए हैं-
स्थान- IGIMS , पटना. चपरासी भागे भागे डायरेक्टर के ऑफिस में आता है-
‘सर, हेल्थ मिनिस्टर तेजप्रताप  आये हैं….औचक निरीक्षण करने’
‘क्या बोल रहे हो…वो तो आधा घंटा पहले से आकर निरीक्षण कर रहे हैं…बुलाओ दोनों को यहाँ’
कुछ देर बाद दोनों ‘हेल्थ’ मिनिस्टर डायरेक्टर के रूम में मौजूद हैं-
‘आप दोनों में से असली तेजप्रताप कौन है’
लालूजी- ‘तेजप्रताप मैं हूँ…मार्क इधर है’
असली तेजप्रताप- ‘कौन सा मार्क…कैसा मार्क…मैं हूँ तेजप्रताप’
लालूजी- ‘तेजप्रताप मैं हूँ…मार्क इधर है’
असली तेजप्रताप- ‘अरे भाड़ में गया मार्क…मैं हूँ तेजप्रताप’
गुस्से में तेजप्रताप अपने गन से एक राउंड फायर कर देता है…
चपरासी- ‘सर आप जो घोड़वा पर आये थे वो बन्दूक के आवाज़ से बिदक कर भाग गया’
तेजप्रताप घोड़े के पीछे भागता है.
लालूजी- ‘बोले थे की भैंसी से बेहतर कोई सवारी नहीं है…मगर इनको फुटानी में घोड़े पर चढ़ना है..अब पकड़ के दिखाओ’

३. ग़ुलाम-
सॉन्ग- आती क्या खंडाला:
‘ए…का बोला तारा’
‘ए… का हम बोलीं’
‘सुन’
‘सुना’
‘आवता का डाकबंगला चौराहा’
‘का करब, आके हम डाकबंगला चौराहा’
‘फरेजर  रोड पर बउआएंगे…सेंट्रल में मुँह बा के आएंगे…हरनिवास में चुरमुर चाट  खाएंगे…फिर ऑटो पकड़ के वापस घर जायंगे…अउ का ?’

4. दामिनी- फेमस तारीख पे तारिख –
स्थान- पटना यूनिवर्सिटी
गोविन्द- ‘वि-सी सर…यहाँ हमारा एग्जाम कभी नहीं होता…मिलती है तो सिर्फ तारिख…आज आप एक नयी तारिख देंगे…तब तक  नॉन-टीचिंग का स्ट्राइक हो जायेगा…फिर आप नयी तारिख देंगे…फिर हो सकता हैं हमें नया सेंटर पसंद ना  आये…और हम आके यूनिवर्सिटी में बम पटक दें…आप फिर एक नयी तारिख देंगे…तब तक हो सकता है इलेक्शन शुरू हो जाएं…आप फिर एक नयी तारिख दे देंगे…यहाँ हम स्टूडेंट्स को कभी टाइम पे एग्जाम देने को नहीं मिलता…मिलती है तो सिर्फ तारिख…तारीख पे तारिख…तारिख पे तारिख…तारिख पे तारिख मिली…मगर एग्जाम नहीं हुआ सर…
एग्जाम के लिए कुछ लड़के सचमुच की पढाई करते हैं…मगर उन्हें मिलती है तो सिर्फ तारिख…एग्जाम के लिए कुछ लोग पूरी की पूरी किताब का माइक्रो-ज़ेरॉक्स करवा डालते हैं…मगर उन्हें भी मिलती है तारिख…एग्जाम के कुछ लोग अपने कपड़ो में स्पेशल पॉकेट्स बनवाते हैं…मगर उन्हें भी मिलती है तो सिर्फ तारिख…कुछ लोग तो एग्जाम का वेट करते करते खुद ही बन जाते हैं तारिख…मगर उन्हें भी मिलती है सिर्फ तारिख’

5. करण-अर्जुन-
राखी- मेरे करण अर्जुन आएंगे…छठ में वो अपनी माँ को अकेला नहीं छोड़ेंगे

अमरीश पूरी- पागल बुढ़िया…तेरे करण -अर्जुन ने अपनी सारी छुट्टियां तेरे मायके में हुई चार चार शादियों में खत्म कर दी…जो कैजुअल लीव बची थी उसमे वो तुझे बिना बताये थाईलैंड घूम आये…वो आई-टी में काम करते हैं बुढ़िया…वहां छठ की एक दिन की भी छुट्टी नहीं मिलती. कहाँ से आयंगे तेरे करण- अर्जुन…अब तक तो तत्काल में भी रिग्रेट वेटिंग लिस्ट हो गया होगा.

राखी- तू देखना ठाकुर…मेरे करण- अर्जुन आएंगे. अपने बॉस से झगड़ा करके आएंगे…नकली मेडिकल सर्टिफिकेट बनवा कर आएंगे…ट्रैन के टॉयलेट में बैठ कर आएंगे…मगर मेरे करण अर्जुन आएंगे.

अमरीश पूरी- ठीक है बुढ़िया…अगर वो आ भी गए तो उनके हाथों छठ का प्रसाद भिजवा देना. हर साल सिर्फ हमरे यहाँ से ही प्रसाद जाता है.

6.  हेरा- फेरी- बाबू भैया को रेप्लस किया है लालू भइया ने-
फ़ोन बजता है-
लालू भैया- ‘हेलो’
‘मैं चंदू सोलंकी बोलता है…देवीप्रसाद है क्या?’
‘अरे कौन देवीप्रसाद…इधर लालूप्रसाद रहता है…देवीप्रसाद नहीं’

फ़ोन फिर बजता है
‘हेलो…पशुपालन विभाग…भैंस का चारा है क्या’
‘आंSS…वो तो मैं खा गया’
‘खा गए??’
‘हाँ…वो मैं मस्त सत्तू में मिला के,  वो  मैं खा गया’

७. गैंग्स ऑफ़ वास्सेपुर-
इसका पटनाकरन तो कश्यप बाबू ने खुद ही कर दिया था…हमारे लिए कोई स्कोप नहीं छोड़े.

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